चुनौती और उम्मीदें लेकर आ रहा है 2021 | VentAllOut blog

मानव इतिहास में सबसे बड़ी त्रासदी उन लोगों के लिए होती है जो वर्तमान चुनौतियों या कठिनाइयों से संघर्ष करते हैं न कि उन लोगों के लिए जो भविष्य में उसकी विवेचना और भूतकाल में उसके होने की भविष्यवाणी करते हैं। यदि भारत के संबंध में बात करें तो आज़ादी का संघर्ष और बंटवारे की आग के बाद कई छोटे-बड़े दंगों और लड़ाईयों को जीने वाले लोगों के लिए वह समय कितना कष्टदायक और कठिन रहा होगा शायद हमारे लिए यह महसूस करना भी अब असंभव है। आज हम उन सब की विवेचना करके केवल चंद मिनटों में अपना फैसला ले लेते हैं कि वह समाज या वे तत्कालीन लोग किन मुद्दों व समय मे गलत अथवा सही रहे।

अब वर्ष 2020 समाप्त होने वाला है, इस वर्ष की विभिन्न लेखों व पुस्तकों के माध्यम से आने वाला भविष्य केवल विवेचना ही करेगा। लेकिन असल मे उन लोगों का क्या जिन्होंने ने इस त्रासदीपूर्ण वर्ष को काटा है। वर्ष 2020 के शुरुआत से ही कोरोना की सुगबुगाहट भारत समेत सम्पूर्ण विश्व मे दिखाई दे रही थी। यह वर्ष उस पीढ़ी के सामने एक नई चुनौती की तरह था जिसने न तो पाकिस्तान-भारत युद्ध को महसूस किया न किसी अन्य महामारी का शिकार बना। लॉकडाउन, कर्फ्यू आदि नियम इस पीढ़ी के लिए एक सबक बन गये। जब संपूर्ण विश्व यह सोच रहा था कि बुनियादी सुविधाएँ न होने के बाद भी भारत में लाशों की संख्या क्यों नहीं बढ़ रही है। तब भारत भविष्य की ओर टकटकी लगाकर विश्वकल्याण की कामना कर रहा था। अपने लिए जरूरी सुविधाओं को जुटाने के साथ दूसरे राष्ट्रों की मदद से भी यह भारत पीछे नहीं हटा। अपने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आजमाने के साथ घरेलू नुस्खे, फिर एक काढ़े व अन्य प्रयोगों के रूप में देश के हर घर मे देखने को मिले।

यह बात सही है कि वर्ष 2020 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं रहा लेकिन यह भी सही है कि भारत ने खुद को पहचाना है, अपनी बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने के प्रयास आरंभ कर दिए हैं। कोरोना की वैक्सीन के विकास से लेकर वेंटिलेटर और मास्क सभी के उत्पादन में भारत आज एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की राह पर है। लेकिन इसी के साथ भारत के लिए वर्ष 2021 में चुनौतियां और उम्मीदे बढ़ने वाली हैं। और उम्मीदें तभी तक जागृत रहती हैं जब आप लगातार चुनौतियों पर विजयी होते हैं। वर्ष 2021 में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानसिक स्वास्थ्य और अवसाद जैसे मुद्दों पर जनजागरण करने के साथ एक स्वस्थ भारत के निर्माण की रहेगी। कोरोना की वैक्सीन जन-जन तक पहुंचे इससे बड़ी चुनौती लोगों में उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करने की होगी। अकेलापन जैसे मुद्दों पर परिवार में बात कर माहौल बनाने की क्षमता के विकास की होगी। अब हमें यह समझना होगा कि सुशांत सिंह राजपूत जैसे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व फिर हमारे बीच से अवसादग्रस्तता के कारण न जाने पाये। नशा और विभिन्न वे मुद्दे जिन पर जनता केवल किसी प्रसिद्ध व्यक्तित्व के नाम आने पर ही ध्यान देती है; ऐसी परिस्थितियों को बदल कर इन सभी मुद्दों पर एक आम सहमति बनानी होगी। अंत मे यही कि भारत एक नये भविष्य की राह की ओर तेजी से बढ़ रहा है जहां वर्ष 2021 उसकी नये चुनौतियों के साथ स्वागत करने को तैयार है


Posted : 4 months ago

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