कोरोना के बाद आने वाला समय कैसा होगा? | VentAllOut blog

आज सम्पूर्ण दुनिया कोरोना से पीड़ित है। दुनिया के बड़े-बड़े देश भी आज इस महामारी से निजात नहीं पा सके हैं। हांलाकि सभी देश और संगठन अपने-अपने स्तर पर इस बीमारी की दवा या यूँ कहें कि वैक्सीन बनाने की तैयारी में लगे हुए हैं। हो सकता है कि वैक्सीन मिल भी जाए; लेकिन इसमें थोड़ा समय तो निश्चित ही लगेगा। लेकिन तब तक दुनिया में काफी कुछ बदल जाएगा। दुनिया एक नए समाजिक संगठन की ओर बढ़ जायेगी। सरकारें अपने

-अपने देशों में रिसर्च-डेवलपमेंट,शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने का प्रयास करेंगी।जो एक इस महामारी के कारण ही सही लेकिन एक अच्छा कदम साबित हो सकता है। 

मानव ने जब से सामाजिक प्राणी के रूप में रहना सीखा तब से मानव ने लगातार परिवर्तन और विकास की राहों को अपनाकर जीवन को बढ़ाया और समृद्ध किया है। इससे पहले जब दुनिया में कोरियन फ्लू और इबोला जैसी महामारी आई तो दुनिया में विकास के नए मॉडल के रूप में दक्षिण कोरिया आया। जहां स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर जागरूकता बढ़ी।  आज ऐसा ही कदम भारत सहित सम्पूर्ण दुनिया को उठाना है। इसके लिए सामाजिक संगठन और व्यवस्था में थोड़े परिवर्तन तो करने पड़ेंगे लेकिन निश्चित ही दुनिया इन परिवर्तनों के फलस्वरूप एक बेहतर कल की ओर बढ़ेगी। 

इन परिवर्तनों से सम्बंधित पहला पाठ हमने कोरोना के शुरू होते ही सीखा और वह था “हाथ-धोना”, हमें यह आम सी बात लगती है लेकिन इंडिया में ही हाथ न धोने के कारण लाखों लोगों की मृत्यु हो जाती है। इससे निश्चित ही आने वाले समय लोग एक डेली हैबिट की तरह लोग हाथ धोयेंगे और अपने स्वास्थ्य को बेहतर कर सकेंगे। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग एक और हैबिट है जो आने वाले समय में लोगों के जीवन का अभिन्न भाग होगा। साथ ही हमारा एजुकेशन सिस्टम काफी बदल सकता है उसमें तकनीकी और डिजिटल का प्रयोग बढ़ सकता है जिससे 

आने वाले समय में स्कूल,कॉलेज या कोचिंग जाने की अनिवार्यता ख़त्म हो सकती है। सरकारें अपने नागरिकों के हेल्थ रिकॉर्ड को सुरक्षित डेटा के रूप में रखने की तैयारी कर सकतीं हैं जिससे बिमारियों का इलाज बेहतर तरीके  से

हो सकेगा। क्रिकेट जैसे खेलों में काफी कुछ बदल जायेगा। शॉपिंग  मॉल,रेलवे आदिस्थानों में टोकन प्रणाली देखने को मिल सकता है जिससे भीड़ जमा होने से रोका जा सकेगा। ऑनलाइन थिंग्स का प्रयोग हमें बड़े पैमाने पर देखने को मिल सकता है। वर्क कल्चर में परिवर्तन देखने को मिल सकता है; फ्रीलांस और वर्क फ्रॉम होम के कॉन्सेप्ट में वृद्धि देखने को मिल सकता है।सबसे ज्यादा परिवर्तन फ़ूड हैबिट में देखने को मिल सकती है जहाँ विश्व शाकाहार की ओर बढ़ सकता है। इन सबके अलावा महानगरों की ओर होने वाले पलायन में कमी और नए-नए स्टार्टप्स देखने को मिलेंगे। इन सबके प्रभाव से एक नया सामाजिक ताना-बाना देखने को मिल सकता है। जो सबके लिए लगभग नया और मुश्किल ही होने वाला है।लेकिन हमें इसे अपनाना ही पडेगा।

लेकिन इन परिवर्तनों के उलझनों के बीच याद रखने वाली बात मानवता की है। हो सकता है कि बहुत लोग अकेले या फैमिली सहित एकांत रहने का प्रयास करें; लेकिन इन सब के बीच याद रहे कि जितना हो सके अपने आस-पास जरूरतमंदों की मदद करें। मानवता ने ही इस पृथ्वी पर मानव जीवन की संभावनाओं को बचा के रखा है। हमेशा याद रखिये कि परिवर्तन में अपनी आदतें बदलिए ना कि दूसरों के लिए अपने दिल के दरवाजे बंद करिये।


Posted : a month ago

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