कोरोना के बढ़ते केस और निजात की उम्मीदों पर टिकी दुनिया | VentAllOut blog

कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए सभी देश वैक्सीन बनाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर भारत में एक्टिव केसों में आई गिरावट सबका ध्यान अपनी ओर खींचती है। कोरोना वायरस की पहली लहर के समय यही कहा गया था कि भारत की बड़ी जनसंख्या इस वायरस की चपेट में आएगी, जो कि कहीं न कहीं काफी सच भी था. पर हाल के छह दिनों की बात की जाये तो भारत में आ रहे एक्टिव केसों में 5 हज़ार से ज्यादा की गिरावट इस भविष्यवाणी को गलत साबित करती है .भारत की बड़ी जनसँख्या ऐसे क्षेत्रों में निवास करती है जहाँ मूलभूत सुविधाओं की कमी है और ये जनसँख्या अगर इस महामारी से पीड़ित हो जाती तो भारत की स्थिति और भी भयावह होने की पूरी उम्मीद थी. सितंबर के मध्य बाद से आती इस गिरावट ने एक नई उम्मीद बांधी है,  आज उस समय के मुकाबले पिछले छह दिनों में एक्टिव केसों की संख्या करीब 50 प्रतिशत कम हुई है.

वहीं अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में कोरोना वायरस के संक्रमण में लगातार इजाफा ही हुआ है, और मृत्यु दर भी काफी अधिक रही है. इसके चलते यूरोपीय देश एक बार फिर लॉकडाउन का ऐलान कर चुके हैं, पहले फ्रांस, उसके बाद इंग्लैण्ड. अमेरिका में भी कोरोना की नई लहर देखने को मिल रही है. वैसे तो  भारत संक्रमित देशों के लिहाज से दुसरे नंबर पर है, पर यदि हम भारत की जनसँख्या घनत्व को सामने रख कर तुलना करें तो वह अन्य के मुकाबले काफी अच्छी स्थिति में है. यह सब भारत जैसे देश मे, कम घनत्व क्षेत्र में अधिक जनसँख्या वास होने के कारण असंभव लगता था. पर राज्य सरकारों, केंद्र सरकार और प्रशासन ने इस महामारी को नियंत्रण में रखने में काफी कार्य किया. 

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 4 लाख 38 हज़ार 677 है और नए डिस्चार्ज मरीजों के बाद कुल ठीक हुए मरीजों की संख्या 86 लाख 4 हज़ार 955 है. बहरहाल, यदि केवल दिल्ली, की बाद की जाये तो यहाँ की स्थिति कुछ खास नहीं है. लेकिन अब देश अनलॉक की ओर काफी आगे बढ़ चुका है, क्योंकि अर्थव्यवस्था पर कोरोना की चोट को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता. अनलॉक होने के बाद भी शासन-प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को लेकर मुस्तैद है, क्योंकि जब तक वैक्सीन बन नहीं जाती, उसका वितरण सुनिश्चित नहीं हो जाता तब तक देश के प्रत्येक व्यक्ति पर और उनकी आमदनी पर कोरोना हावी रहेगा.

कोरोना केसों में आई यह गिरावट भारत की प्रतिरोधक क्षमता को भी साबित करता है, जहाँ आयुर्वेद और विभिन्न प्रकार के मसालों का उपयोग लगभग प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किया जाता है. आयुष और वाणिज्य मंत्रालय की ओर से आई एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आयुर्वेद और होम्योपैथी के इस्तेमाल में भी इजाफा हुआ है, करीब 30 से 35 प्रतिशत के आयुष औषधियों और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले विभिन्न प्रकार के काढों की बिक्री हुई है. जो कि आयुर्वेद की लगातार बढ़ती स्वीकृति का एक उदाहरण हैं. भारत में कोरोना वायरस की इस प्रकार से कम होती रफ़्तार के लिए श्रेय इन आयुष औषधियों और यहाँ के खान-पान के तरीकों को भी दिया जा सकता है, क्योंकि प्रशासन और आयुष मंत्रालय द्वारा घर-घर इन औषधियों का वितरण समय पर कराया गया, वहीँ रसोईघरों में उपलब्ध विभिन्न मसालों से बनने वाले पौष्टिक पकवानों ने भी अपनी भूमिका निभाई है . 

फ़िलहाल कोरोना वैक्सीन आने और उसके देश की बड़ी आबादी तक सभी को पहुँचने में भी समय लगेगा, इसलिए सरकारों व प्रशासन के साथ ही सभी को सावधानी का पालन करना होगा.


Posted : a month ago

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