डिमेंशिया: एक मानसिक बीमारी | VentAllOut blog

हाल के एक रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में लगभग 50 मिलियन ऐसे लोग हैं जो डिमेंशिया की समस्या से ग्रसित हैं। किसी भी बीमारी की एक निश्चित संख्या का पता हो तो उसे रोकना थोड़ा आसान होता है। लेकिन यहां बड़ी समस्या यह है कि डिमेंशिया के 10 मिलियन रोगी हर साल बढ़ रहें हैं। ऐसे में इस बीमारी की वास्तविक गंभीरता का पता चलता है। इस बीमारी को इस तरह से समझें कि यह कोई बीमारी न होकर मानसिक क्षमता में कमी या कमज़ोरी है। यह एक तरह का सिंड्रोम है अर्थात एक रोग में कई लक्षणों का एक साथ होना। कई लोग डिमेंशिया को ही यादाश्त क्षमता कमी में आई कमी मान लेते हैं। यद्पि कुछ लोग मीमोरी लॉस की बीमारी से ग्रस्त होते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनको अल्जाइमर या डिमेंशिया बीमारी है, मीमोरी लॉस होने के कई कारण हो सकते हैं, कभी-कभी अच्छी नींद न लेना भी आगे आने वाले समय मीमोरी लॉस की समस्या का कारण बन सकता है। 

डिमेंशिया के सामान्य लक्षणों में - स्मरण शक्ति की क्षति का होना, ज़रूरी चीज़ें भूल जाना, सोचने में कठिनाई होना, छोटी-छोटी समस्याओं को भी न सुलझा पाना, रास्ता भटक जाना, व्यक्तित्व में बदलाव, किसी वस्तु का चित्र देखकर यह न समझ पाना कि यह क्या है, नंबर जोड़ने और घटाने में दिक्कत, गिनती करने में परेशानी। यह बीमारी तब ज्यादा गंभीर हो जाती है जब व्यक्ति अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हो जाता है। जब मस्तिष्क कोशिकाएं किसी कारण से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तब डिमेंशिया हो सकता है। इसके कारण मस्तिष्क कोशिकाओं की एक दूसरे के साथ संवाद या कनेक्ट करने की क्षमता पर असर पड़ता है जिससे पीड़ित व्यक्ति की सोच, व्यवहार और भावनाओं पर भी असर होता है। इसको ऐसे भी समझा जा सकता है: हम जानते हैं कि मस्तिष्क के अलग-अलग भाग होते हैं और प्रत्येक भाग  भिन्न-भिन्न कार्य करते हैं। डिमेंशिया सिर की चोट, स्ट्रोक, मस्तिष्क ट्यूमर या एचआईवी संक्रमण के कारण भी हो सकता है। 

डिमेंशिया के कई प्रकार होते हैं जिनमें, डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार अल्जाइमर रोग है। लेवी बॉडीज डिमेंशिया; यह डिमेंशिया का एक रूप है जो कोर्टेक्स में प्रोटीन के एकत्र होने के कारण होता है। याददाश्त में कमी और भ्रम इसके बड़े लक्षण हैं। इस रोग से हर 4-5 सेकंड में कोई-न-कोई व्यक्ति पीड़ित हो जाता है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस बीमारी कोई भी इलाज संभव नहीं है ।सिर पर चोट लगना,, मस्तिष्क में ट्यूमर, संक्रमण, हार्मोन विकार जैसे थायरॉइड रोग, हाइपोक्सिया (खून में खराब ऑक्सीजन), मेटाबोलिक संबंधी विकार, नशे की लत आदि डिमेंशिया ने कुछ ऐसे कारण है जिससे इस रोग के होने का जिखिम बढ़ सकता है। अतः इस बीमारी पर लोगों की जागरूकता बढ़ा कर, बढ़ती उम्र के साथ योग-व्यायाम की सहायता लेकर इस बीमारी से बचा जा सकता है और यदि समस्या बढ़ती जाए तो किसी विशेषज्ञ  से मिलकर उसे जल्द-से-जल्द दूर करने का प्रयास करना चाहिए। प्रयास करें अपनी दिनचर्या में सुधार करें, अच्छी या जरूरी नींद अवश्य लें।


Posted : a month ago

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