कोरोना से प्रभावित होती याददाश्त क्षमता  | VentAllOut blog

कोरोना अर्थात Covid-19 से जब दुनिया तेजी से प्रभावित होना शुरू हुई तो सोशल-डिस्टन्सिग, मास्क आदि उपाय खोज कर Covid-19 की रफ़्तार को कम किया गया। फिर विश्व के बड़े देशों ने अपने-यहाँ लॉक-डाउन का सहारा लिया। जिसके तहत लोगों को उनके घर में ही रहने की सलाह दी गई। जो भारतीय रेल कभी युद्ध की भयंकर स्थितियों में नही रोकी गयी,आज उसकी गति पर भी विराम लगा दिया गया है। इससे आप स्थिति कितनी ख़राब है इसका अंदाजा लगा सकते हैं। लेकिन इस लॉकडाउन के बीच कुछ ख़बरें ऐसी आ रहीं हैं जिनसे मनुष्य के खराब होते मानसिक स्वास्थ्य के बारे में पता चलता है, जो कि चिंता का विषय है। इतने समय तक तमाम मिडिया चैनलों केवल-और-केवल कोरोना की खबरें ही चल रहीं हैं; कभी कहीं से एक दिन में लाखों लोगों के प्रभावित होने की ख़बर आती है तो कभी एक ही दिन में हजारों लोगों के मरने की ख़बर। कुछ ऐसी भी घटनाएं सुनने को मिलीं जहां कुछ लोगों ने अपने हल्के खांसी-जुकाम को कोरोना समझकर आत्महत्या कर ली। इन सभी घटनाओं का परिणाम यह हुआ कि मानव मस्तिष्क अपने सभी सपनों, लक्ष्य, काम आदि को छोड़कर लगातार एक ड़र वातावरण में जीने लगा।

कोरोना से लड़कर वापस आम जिंदगी में आने वाले लोगों को तवज्जो देने के स्थान पर मानवीय मस्तिष्क ने भय, नाउम्मीदी और अतार्किकता को महत्व दिया । जिसका परिणाम यह हुआ कि कोरोना से प्रभावित होकर वापस ठीक होने वाले तथा अप्रभावित दोनों की याद्दाश्त क्षमता प्रभावित होने लगी। डॉक्टरों का मानना है कि जो लोग कोरोना से ठीक हो रहें हैं उनमें पोस्ट कोविड सिम्पटम दिखाई देने लगे हैं, जिसमें याद्दाश्त क्षमता का कमजोर होना सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है। राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टर बताते हैं कि पोस्ट कोविड क्लीनिक में इलाज कराने आए 250 लोगों मे से 80 लोगों में न्यूरो समस्याएं देखने को मिली हैं। इनमें करीब 20 फ़ीसदी लोग ऐसे हैं जिन्हें भूलने की समस्या हो रही है। यदि डब्ल्यूएचओ की मानें तो जब कोई कोविड-19 से उबर रहा होगा तो तब यह समस्याएं कुछ हफ्तों या महीनों में अपने आप दूर हो जाएंगे, लेकिन कुछ लोगों में यह लक्षण ज्यादा वक्त तक भी रहे सकते हैं। तब ऐसे में उम्मीद न खोएं। अपने को व्यस्त रखें,नकारात्मक विचार मन मे न आने दें।अपने दिमाग को चिंता व तनाव से दूर रखने तथा इस भय और लॉकडाउन की कष्टदायी घड़ी को बिताने के लिये अपनी हॉबी पर काम कर सकते हैं। इससे आपमे जीवन के प्रति उत्साह भी जागृत होगा तो साथ ही इस विपत्ति की घड़ी से उबरने का साहस भी मिलेगा। हमेशा याद रखिये हर विपत्ति का अंत होता ही है तो इसका भी अंत होगा। आने वाली सुनहरी सुबह का इंतजार करिये और हिम्मत कभी मत हारिये। सकारात्मक ऊर्जा और जुझारूपन ही हमें इस संकट की घड़ी से उबार सकता है। यादाश्त क्षमता को बढाने के उपायों पर कार्य कीजिये हो सके तो व्यायाम और मेंटल एक्सर्साइज का भी सहारा लीजिये। और जब लगने लगे कि परिस्थितियां हाथ से बाहर निकल रही हैं तो किसी मनोचिकित्सक की भी सहायता लीजिये।

 


Posted : 2 months ago

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