भारतीय यूथ के सामने वर्तमान चुनौतियां | VentAllOut blog

आज का दौर ऐसा है कि चुनौतियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। कोरोना ने इस संघर्षशील और अत्यंत प्रतियोगी समय में चुनौतियाँ को और बढ़ा दिया है। परिणामस्वरूप मनुष्य जाति अपने सबसे बड़े संघर्ष के दौर से गुजर रही है। जिसके एक तरफ तो आने वाला बेतरीन समय है और दूसरी तरफ वर्तमान समय जहाँ जीवन को बनाये रखने की संकट भी है। ऐसे में हर समाज और देश अपने बेहतर भविष्य के लिए अपने युवा या यूथ वर्ग से आशा भी रखता है और अपेक्षा भी करता है। लेकिन इस समय इन्ही युवाओं के सामने कई चुनौतियां हैं। 

भारत इस मामले कई विकसित देशों से बेहतर की स्थिति में है कि देश की ज्यादा आबादी युवा है। लेकिन आज देश का युवा अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है। शिक्षा, रोज़गार और बेहतर भविष्य के लिए आज का युवा जागरूक है और लड़ रहा है और सिर्फ अपने लिए ही नहीं, अपितु इस देश के लिए भी उतना ही सजग है। 

इन तमाम चुनौतियों में हमारे युवा वर्ग के सामने सबसे बड़ी चुनौती है रोज़गार की, सरकारें बदलती जाती हैं लेकिन रोजगार की समस्या लगातार बनी हुई है। NCRB द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार हर 2 घंटे में 3 बेरोज़गार खुदकुशी कर रहे हैं। यह आकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट की मानें तो वर्ष 2018 में  लगभग 12 हज़ार लोगो ने बेरोजगारी से परेशान होकर खुदकुशी कर ली थी। एक सर्वे के अनुसार रोजाना साढ़े पांच सौ नौकरियां घट रही हैं।

एक रिपोर्ट की मानें तो भारत दुनिया में नशाखोरी के मामले में दूसरे स्थान पर है। यहां लगभग 11 करोड़ युवा धूम्रपान की गिरफ्त में हैं। देश में प्रतिवर्ष धूम्रपान की वजह से लगभग 10 लाख लोगों की मौत हो रही है। देश में करीब 21.4 प्रतिशत युवा शराब के नशे का शिकार हैं। नशे के कारण जहां एक ओर अपराध बढ़ते हैं वहीँ दूसरी ओर कार्य क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है।

आज के युवाओं के सामने बड़ी समस्या भ्रष्टाचार है, क्योकि भ्रष्टाचार की वजह से कई तरह के नुकसान होते हैं बता दे कि, भारत की प्रमुख कारोबारी संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन फिक्की का कहना है कि भारत में प्रतिवर्ष भ्रष्टाचार के कारण लगभग सात अरब डॉलर का नुकसान होता हैं। यही नहीं भ्रष्टाचार का सीधा असर निवेश पर पड़ता है जिससे युवा प्रभावित होते हैं। इससे जहाँ युवाओं में अपने सरकार के ऊपर विश्वास की कमी आती है वहीँ अवसाद-ग्रस्तता भी बढ़ती है। 

इन सब के अलावा आज का युवा वर्ग बिखरते रिश्ते और तनाव-ग्रस्तता से भी पीड़ित है। छोटी-छोटी बात पर डिप्रेशन में जाना आज एक हैबिट बन चुकी है। जिसके कारण आत्महत्या की घटनाएं लगातार बढ़ रहीं हैं। ऐसे में इस युवा देश को सही नेतृत्व के साथ प्रेरणा की जरूरत है। स्वामी विवेकानंद का यह कथन "स्वर्ग पूजा करने से नहीं अपितु फुटबॉल खेलने से मिलेगा।" युवाओं की काफी मदद कर सकता है क्योंकि स्वस्थ शरीर ही मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से एक बेहतर इंसान का निर्माण करते हैं। तो यदि युवा भावनात्मक रूप से कमजोर है या तनाव में है तो उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाएँ क्योंकि इससे न केवल आप एक युवा को बचाते हैं अपितु देश के लिए मानव संसाधन की रक्षा भी करते हैं।


Posted : 3 weeks ago

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