कोविड से ठीक होने वाले लोगों के साथ समाज का व्यवहार  | VentAllOut blog

किसी भी बीमारी से लड़कर ठीक होना अथवा वापस रिकवर होना अपने आप में किसी जंग जीतने से कम नहीं होता। किसी बीमारी से पीड़ित होने के बाद एक मजबूत मनोबल,आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति की जरूरत होती है जिससे पीड़ित व्यक्ति वापस स्वस्थ होकर हमारे बीच वापस लौटता है। लेकिन समाज की मानसिकता देखिये जिस पीड़ित को हमें अपने हीरो की तरह ट्रीट करना था, उसे हमने अपने समाज से ही अलग कर, छूत की तरह व्यवहार करने लगे। जो कि कभी-कभी काफी भयावह हो उठता है जब इन कारणों से कोई मनुष्य बिमारी को हराकर 'अवसादग्रस्तता या डिप्रेशन' से पीड़ित हो उठता है।

 स्थिति और भी खराब तब होने लगती है जब कोरोना वायरस या कोविड से कोई मनुष्य पीड़ित हो जाता है क्योंकि एड्स की तरह वर्तमान में कोविड का भी कोई इलाज नहीं है। अतः ऐसे में कुछ केस सामने आये जब किसी कॉलोनी या घर में कोई एक व्यक्ति पीड़ित हो गया और ठीक होने पर अन्य लोगों द्वारा  उसका एक तरह से बहिष्कार किया जाने लगता है। यह एक बेहतर समाज के लिए कभी अच्छा नहीं माना जा सकता।

 हमें अपनी मानसिकता से यह निकलना होगा कि किसी बिमारी से पीड़ित होने के बाद उससे रिकवर करने के बाद लोगों में उसके अंश मौजूद रहते हैं। यह केवल एक तरह की नकारात्मकता होती है जो हमें यह कभी स्वीकार्य करने ही नहीं देती कि व्यक्ति अब पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर लौटा है। यदि आप रिकवर होने वाले व्यक्ति से जुड़ेंगे नहीं उसका मनोबल बढ़ाएंगे नहीं तो यह धीरे-धीरे सम्पूर्ण समाज को ही अलग-थलग कर डालेगा। क्योंकि  यह एक ऐसी बिमारी है जिससे आज कोई आपके आस-पास पीड़ित है और हो सकता है कि कल आप भी इससे पीड़ित हो जाएँ। अतः इससे पहले कि यह सामाजिक व्यवस्था ही टूट जाए, संभलिए। हमें हर पीड़ित को मनुष्य की तरह ट्रीट करना होगा वापस ठीक होने पर उसके मनोबल को बढ़ाना होगा। इस दुनिया में सुख-दुःख लगे रहते हैं आज के इस दुःख को संभालिये, आने वाले समय पर विश्वास रखिये। एक बार फिर से नया सूरज खिलेगा और रोशन होगा हमारा ये सारा जहाँ।

समाज में बदलाव तेजी से नहीं होते यह एक धीमी प्रक्रिया है जो चलती रहती है। लेकिन इसकी शुरुआत हमें ही करनी होगी। सरकार भी अपने स्तर पर ऐसी चीजों को रोकने का हर सम्भव प्रयास कर रही है। हमें सरकार की गाइडलाइन्स का पालन करते हुए अपने स्तर पर पीड़ितों और बीमार लोगों की हर सम्भव मदद करनी होगी। हमारी संस्कृति भी हमें सिखाती है “नर सेवा ही नारायण सेवा है।” अतः मनुष्य होने के नाते हमें दूसरे मनुष्यों के प्रति प्रेम,सहायता और करुणा का भाव रखना ही चाहिए। ताकि किसी भी व्यक्ति में नकारात्मकता या अवसादग्रस्तता जैसी कोई भावना न आये। यदि कोई व्यक्ति किसी बिमारी से लड़कर वापस आ रहा है तो उसका हौंसला बढ़ाना चाहिए उससे बातें करनी चाहिए न कि उससे दूरी बनानी चाहिए।

 


Posted : 2 weeks ago

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